यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के दिल्ली सरकार के प्रयासों को झटका लग सकता है। इंटरसेप्टर सीवर प्रोजेक्ट (आईएसपी) लगाने वाली एक कंपनी दिवालियेपन की कगार पर पहुंच गई है। इसकी वजह से परियोजना का काम पूरा होने में देरी हो सकती है।

दिल्ली जल बोर्ड ने यमुना निगरानी समिति के समक्ष यह जानकारी दी है। दूसरी कंपनी भी आईएसपी का काम पूरा करने की बार-बार तारीखें बदल रही है। आईएसपी के जरिए नालों में जाने वाले सीवर के पानी को रोककर इसे ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाता है ताकि यमुना में गंदे पानी को जाने से रोका जा सके। यमुना निगरानी समिति के साथ हुई बैठक में दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य अभियंता ने यह जानकारी दी।

मुख्य अभियंता ने समिति को बताया कि आईएसपी लगाने का काम कर रही मेसर्स प्रतिभा इंडस्ट्रीज लिमिटेड दिवालियेपन के कगार पर पहुंच चुकी है। हालांकि, उन्होंने समिति को बताया कि जल बोर्ड अब खुद आईएसपी का काम पूरा करने का प्रयास कर रही है। जल बोर्ड ने समिति को बताया कि परियोजना को रद्द करके काम पूरा करने के लिए दोबारा ठेका जारी करने से इसमें और भी देरी हो सकती है। निगरानी समिति के सदस्य बी.एस. साजवान की अध्यक्षता में हुई बैठक में जल बोर्ड ने यह भरोसा जताया कि दिसंबर, 2019 तक आईएसपी लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।