मथुरा. 2014 के चुनाव में भाजपा ने बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी को मैदान में उतारा था। इसके बाद यह सीट हाई प्रोफाइल हो गई। हेमा मालिनी ने एक दशक के सूखे को खत्म करते हुए यहां कमल खिलाया। एक बार फिर हेमा मालिनी भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। यह सीट गठबंधन ने रालोद को दी है। रालोद ने यहां कुंवर नरेंद्र सिंह को टिकट दिया है। 18 अप्रैल को यहां मतदान है। 12 उम्मीदवार यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ये भी पढ़ेंबसपा ने गाजीपुर में भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा के सामने बाहुबली मुख्तार के भाई को मैदान में उतारा सत्ता विरोधी लहर में जीता लोकदल1952 के चुनाव में कांग्रेस ने मथुरा सीट से कृष्णा चंद्रा को उम्मीदवार बनाया था। तब यहां से छह उम्मीदवार मैदान में थे। कृष्णा ने जीत दर्ज की। लेकिन, 1957 में कांग्रेस ने दिगंबर सिंह को टिकट दिया। इस बार वे निर्दलीय उम्मीदवार महेंद्र प्रताप से हार गए। फिर 1962, 1971, 1984 और 2004 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की। 1977 में चली सत्ता विरोधी लहर में कांग्रेस को यहां से हार का सामना करना पड़ा और भारतीय लोकदल ने जीत हासिल की। चौधरी तेजवीर सिंह तीन बार लगातार सांसद चुने गए1980 में जनता दल यहां से चुनाव जीता, लेकिन 1984 में कांग्रेस ने एक बार फिर यहां बड़ी जीत हासिल की। इसके साथ, कांग्रेस के लिए यहां लंबा वनवास शुरू हुआ और 1989 में जनता दल के प्रत्याशी ने यहां जीत दर्ज की। इसके बाद यहां लगातार 1991, 1996, 1998 और 1999 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की। इस दौरान चौधरी तेजवीर सिंह लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीते। 2004 में कांग्रेस का वनवास खत्म, मानवेंद्र सिंह ने कराई वापसी2004 में कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह ने यहां से वापसी की। 2009 में भाजपा के साथ लड़ी रालोद के जयंत चौधरी ने यहां से एक तरफा बड़ी जीत दर्ज की। जयंत ने बसपा प्रत्याशी श्याम सुंदर को हराया। लेकिन 2014 में चली मोदी लहर में अभिनेत्री हेमा मालिनी ने 50 फीसदी से अधिक वोट पाकर जीत दर्ज की। पूर्व पीएम अटल की जब्त हो गई थी जमानतपूर्व पीएम स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को साल 1957 में जनसंघ ने तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया। लखनऊ में कांग्रेस के पुलिन बिहारी बनर्जी ने अटल जी को मात दी। वहीं, मथुरा में उनकी जमानत जब्त हो गई। उन्हें महज 23 हजार 620 वोट मिले थे। वाजपेयी के समर्थन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय और नानाजी देशमुख ने एक दिन में 14-14 सभाएं की। इसके बाद भी अटल बिहारी वाजपेयी हार गए। हालांकि बलरामपुर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर वह लोकसभा पहुंचे। अब तक हुए चुनावों पर एक नजर- साल जीते 1952 कृष्णाचंद्रा (कांग्रेस) 1957 राजा महेंद्र प्रताप सिंह (निर्दल) 1962 चौधरी दिगंबर सिंह (कांग्रेस) 1967 जीएसएसएबी सिंह (निर्दल) 1971 चकलेश्वर सिंह (कांग्रेस) 1977 मनीराम (भारतीय लोकदल) 1980 चौधरी दिगंबर सिंह (जनता पार्टी सेक्युलर) 1984 मानवेंद्र सिंह (कांग्रेस) 1989 मानवेंद्र सिंह (जनता दल) 1991 स्वामी साक्षी जी (भाजपा) 1996 तेजवीर सिंह (बसपा) 1998 तेजवीर (भाजपा) 1999 चौधरी तेजवीर सिंह (भाजपा) 2004 मानवेंद्र सिंह (कांग्रेस) 2009 जयंत चौधरी (राष्ट्रीय लोकदल) 2014 हेमा मालिनी (भाजपा)