बड़ी संख्या में शहरों से पलायन कर गांव तक पहुंच रहे प्रवासी श्रमिकों को क्वारंटाइन कर पाना मुश्किल होता जा रहा है। भीषण गर्मी के चलते इनको बाहर रखा नहीं जा सकता है और गांव में इतने ज्यादा मकान नहीं हैं कि सभी को अलग-अलग रखा जा सके। ऐसे में ब्लॉक या जिला स्तर पर क्वारंटाइन करने पर विचार किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे कई राज्यों में यह समस्या सामने आई है। गांव में पहुंचने पर कुछ लोगों को तो स्कूलों और दूसरे भवनों में रखा जा रहा है, लेकिन अब लगातार श्रमिकों की वापसी हो रही हैं तो दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। ब्लॉक और जिला स्तर पर भी इतने लोगों के लिए व्यवस्था संभव नहीं है।

इन केंद्रों पर खाने-पीने और गर्मी से बचने के उपाय भी नहीं हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को अपनी सारी ताकत झोंकने के बाद भी सभी पहुंचे प्रवासी मजदूरों को और जो अभी पहुंचने वाले हैं उनको मौजूदा प्रोटोकॉल के तहत क्वारंटाइन कर पाना मुश्किल होता जा रहा है।

देश में चार करोड़ प्रवासी श्रमिक, 75 लाख घर लौटे

केंद्र ने शनिवार को कहा कि देश भर में करीब चार करोड़ प्रवासी श्रमिक विभिन्न कार्यों में लगे हुए हैं। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से अब तक उनमें से 75 लाख लोग ट्रेन और बसों से अपने घर लौट चुके हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों से प्रवासी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक मई से श्रमिक विशेष ट्रेन चलाई हैं। उन्होंने कहा कि पिछली जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक देश में चार करोड़ प्रवासी श्रमिक हैं। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान अब तक श्रमिक विशेष ट्रेन से 35 लाख प्रवासी श्रमिक गंतव्य तक पहुंच गए हैं, जबकि 40 लाख प्रवासियों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों से यात्रा की। संयुक्त सचिव ने कहा कि 27 मार्च को गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को यह परामर्श भेजा था कि प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे को संवेदनशीलता से लिया जाए।

प्रोटोकॉल तय करें

केंद्र ने राज्यों को अपनी स्थितियों के अनुसार प्रोटोकॉल तय करने को कहा है। लेकिन कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें केंद्र के नियम अपनाने है। अब कई राज्य अपने यहां इन नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे क्वारंटाइन की अवधि में बदलाव किया जा सके।