मशहूर चीनी अभिनेत्री यांग मी इस साल फरवरी में हांगकांग के 1983 के लोकप्रिय शो ‘द लिजेंड ऑफ द कॉन्डोर हीरोज’ से जुड़े एक वीडियो में नजर आईं। देखते ही देखते उनके वीडियो को 24 करोड़ से ज्यादा हिट मिल गए। बाद में पता चला कि यह वीडियो फर्जी है। कुछ शरारती तत्वों ने शो की लीड हीरोइन का चेहरा यांग से बदल दिया था। पेरिस जलवायु समझौते से जुड़ने के लिए बेल्जियम की आलोचना करने वाला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फेसबुक उपयोगकर्ताओं को
अपनी जागीर बताने वाला मार्क जुकरबर्ग का फर्जी वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ था।

‘डीप फेक’ कहलाने वाले ऐसे फर्जी वीडियो पहली बार 2017 में सामने आए थे। शरारती तत्वों ने पॉर्न वीडियो के कलाकारों के चेहरे हॉलीवुड सितारों से बदलकर इंटरनेट पर बड़ी संख्या में ‘डीप फेक’ परोसे थे। तब ऑडियो-वीडियो से छेड़छाड़ के लिए साधारण ‘एडिटिंग टूल’ का इस्तेमाल किया जाता था। आंखों पर थोड़ा-सा जोर डालकर यूजर भांप सकता था कि वीडियो असली है या फर्जी।

अब शरारती तत्व ‘डीप फेक’ बनाने के लिए ‘जनरेटिव एडवर्सियल नेटवर्क’ जैसे अत्याधुनिक आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल का सहारा ले रहे हैं, जो असली और फर्जी वीडियो के बीच के अंतर को न सिर्फ बेहद बारीकी से पढ़ते हैं, बल्कि उनकी पहचान कर दोनों में इस कदर सामंजस्य बैठा देते हैं कि यूजर के लिए असली-नकली का अंतर भांपना नामुमकिन हो जाता है।

कुछ ही घंटों में तैयार हो जाते हैं

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ‘गैन’ असल से हूबहू मेल खाते

फोटो और वीडियो बनाने के लिए

दर्जनों ‘न्यूरल नेटवर्क’ का इस्तेमाल करता है। ‘न्यूरल नेटवर्क’ एक किस्म का एल्गॉरिद्म समूह है, जो दो अलग-अलग डाटा के बीच की समानता को इंसानी दिमाग की तरह पढ़ लेता है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया को महज कुछ घंटों में एक साधारण ग्राफिक कार्ड के जरिये पूरा कर लिया जाता है।

‘डीप फेक’ एप की भरमार

’डीपन्यूड : यह एप किसी भी महिला की तस्वीर मात्र से उसका पोर्न वीडियो बनाने का विकल्प मुहैया करता है

’जाओ : किसी की फोटो खींचकर उसे फिल्म या टीवी शो के कलाकार के चेहरे पर चिपकाने की सुविधा देता है

चुनाव प्रभावित होने की आशंका

’न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के शोध में चेताया था कि विदेशी ताकतें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने को ‘डीप फेक’ का सहारा ले सकती हैं
’जानकारों का कहना है कि ‘डीप फेक’ ज्यादा विश्वसनीय नजर आते हैं, इनके बढ़ने से भीड़ हत्या की घटनाओं में इजाफा हो सकता है

सोशल साइटों की कवायद

’वीचैट ने ‘आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक’ से ऐसे वीडियो की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करना शुरू कर दिया है, जो ‘जाओ’ पर बनाए गए हैं
’फेसबुक के एआई शोधकर्ता ‘डीप फेक’ बना रहे हैं, ताकि इनकी मदद से फर्जी वीडियो पहचानने वाला टूल ईजाद किया जा सके